"किसी की ज़मीन, किसी का आकाश"

चांद-तारों की ज़मीन, आकाश होता है।

और पेड़ों का आसमान, ज़मीन होती है।

गौर करें तो पेड़ उगते हैं, ज़मीन से, 

और चांद के उगने को आसमान होता है।

कोई ताकता है ज़मीन से, आसमान को,
तो कोई झांकता है आसमान से ज़मीन को।

धरती समेटे है जीवन की संभावनाएं ,
तो आकाश जीवन का विस्तार लिए बैठा है।

देखिए कई बार ,गौर से हर शख्स को,
जाने कौन क्या कुछ, भरे बैठा है ?

कहीं किसी की खामोशी में, छिपा शोर है,
तो किसी की हँसी में, कोई दर्द बैठा है।

हर वजूद में भरी है , कई कहानियां,
सुन सके वो, जो सुनने को तैयार बैठा है।

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