मृत्यु से बड़ा दुःख, अधूरा जीवन —जीवन से बड़ा सुख पूर्ण मृत्यु l
एक कली के भीतर एक फूल छिपा होता है— जैसे कोई अनकही बात, जो अभी शब्दों तक नहीं पहुँची। लेकिन उसका जीवन केवल फूल बन जाने की यात्रा नहीं है। उसके भीतर एक संभावना है— एक ऐसा रूप, जो अभी अस्तित्व में नहीं आया। एक ऐसी सुगंध, जो अभी किसी ने महसूस नहीं की। शायद कली की सबसे बड़ी पीड़ा खिल न पाने की नहीं, अपने भीतर छिपी संभावना को अधूरा छोड़ देने की है। लेकिन फूल का खिलना भी अंतिम उद्देश्य नहीं है। फूल का सौंदर्य केवल उसके होने में नहीं, उसके देने में है। वह अपनी सुगंध अपने पास नहीं रख सकता। खिलते ही वह स्वयं से बाहर जाने लगता है। जो उसके भीतर था, वह धीरे-धीरे संसार का हो जाता है। शायद मनुष्य का जीवन भी इसी रहस्य को समझने की यात्रा है। हम अपने भीतर बहुत कुछ लेकर आते हैं— क्षमता, संवेदना, विचार, अनुभव, सृजन और प्रेम। जीवन का एक हिस्सा हमें यह समझने में लगता है कि हम क्या बन सकते हैं। और दूसरा, शायद उससे भी अधिक महत्वपूर्ण, यह समझने में कि जो हम बन सकते हैं, उससे किसी और को क्या मिल सकता है। क्योंकि केवल अपनी क्षमता तक ...