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मैं अक्सर हार जाता हूँ।

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मैं अक्सर हार जाता हूं ,  तुम्हे बार-बार पाने को, और तुम जो जीत जाती हो, तो मैं भी जीत जाता हूँ। एक मुस्कुराहट सी, जो  फ़िज़ा में फैल जाती है,   मैं भी महक के झूम जाता हूँ । मैैं अक्सर डूब जाता हूँ,और तुम मुझमें तैर जाती हो । मैं शायद, बुड्ढा होने की  हद तक, बड़ा हो गया हूं , और तुम छोटी बच्ची  सी  सुंदर और कोमल ....।   तुम्हारे जीत जाने से मैं दुबारा खेल पाता हूं।... जीवन  में जीवंतता सी, हमेशा जीतती रहना , की मै इसी बात से निरन्तर जीवंत होता हूँ।

Writing to me

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Drafts are nothing less than an individual's craft. Likewise, for a writer, writing is both an expression and a subtle yet profound art—an instrument that breathes life, motion, and voice into an abstract idea, object, or subject. In that fleeting moment of creation, where thought meets the craft of words, the abstract transforms into an eternal expression, capturing the essence of time and space.

A path to least resistance

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Living with sabar (perseverance and patience), loving with a sense of dua (prayer), and letting go with tawakkul (trust in divine will)—perhaps this is the path of least resistance to the cosmic will, where we enter a divine and deliberate flow of grace that transcends our insignificant selves.  That is precisely what Guru Nanak Sahib begins with: 'Hukam rajai chalna, Nanak likhya naal.'"

तुम- जीवन सी

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तुम !  कभी पूर्णतः...मेरी होना मत,  वरना फिर... मैं चाहूँगा क्या !  रहना इक आरजू अधूरी सी, इक चाहत... ना मुकम्मल सी,  हर रोज़... एक नई ख्वाहिश सी ! तुम रहना मेरे पास, बस मेरी ज़िन्दगी सी.

Wealth vs. Money: Understanding the Key Differences

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  Wealth and money are related but distinct concepts. Money Money is a medium of exchange, a tool used to facilitate trade. It exists in the form of cash, bank balances, or digital currency. It can be earned, spent, saved, or invested. Money has no intrinsic value; its worth is derived from trust and economic systems. Wealth Wealth is a broader concept that includes money but extends beyond it. It encompasses assets such as real estate, stocks, businesses, intellectual property, and valuable possessions. True wealth also includes intangible assets like health, knowledge, time, relationships, and peace of mind . Unlike money, wealth is measured in terms of overall financial stability, security, and the ability to sustain a desired lifestyle. Key Differences Aspect Money Wealth Definition A medium of exchange Accumulated assets and resources Nature Short-term, can be spent or lost quickly Long-term, provides financial security Value Defined by purchasing power Defined by sustainabil...

विरोधाभास

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शब्दों के शाब्दिक और गूढतम अर्थों या उपयोग में विरोधाभाषी पराकाष्ठा भी परिलक्षित होती है, जैसे अकेलापन अपने में शाब्दिक रूपों में विरलता लिए है , मगर विशिष्ट अर्थों में सघन अन्धकार लिए भी हो सकता है । हंसी अपने शाब्दिक अर्थ में स्वीकार लिए है , मगर विशिष्ट अर्थों हंसकर बात टाली भी जा सकती हैं। Words often carry paradoxical depths in their contextual meanings. 'Loneliness' may signify rarityand emptiness, yet in a deeper sense, it can feel like outpouring and overwhelming darkness. Likewise, 'laughter' can express acceptance, but sometimes, it is just a way to avoid a conversation.

तुम अच्छी , मैं ठीक- ठाक ।

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मैं किसी से, या कोई मुझसे, पूछता है— "और कैसे हो?" तो एक सहज उद्गार होता है— "ठीक हूँ।" क्योंकि "कैसे हो?" प्रश्न नहीं, एक औपचारिक अभिवादन-सा होता है, सो "ठीक हूँ" भी सिर्फ़ एक सहज, अभिव्यक्ति भर होती है, बिल्कुल सटीक, उत्तर न होकर। अब हम सभी, निर्द्वंद्व,  स्वीकार भी लेते हैं इसे, एक जवाब के मानिंद। जब तुम पूछती हो— "कैसी लग रही हूँ?" और मैं कहता हूँ— "तुम अच्छी लगती हो।" और तुम्हें लगता है, यह भी कोई गढ़ी-बनाई सी बात है। पर मैं कैसे बताऊँ कि— इस पतझड़ के ठूँठे पेड़ पर , खिला, पहला फूल हो तुम। और पुष्प  पूर्ण होते हैं, स्वयं में, भला पुष्प को भी श्रृंगार की, आवश्यकता होती है.. क्या ? तुम मुझे अच्छी लगती हो, जैसी की तैसी, पूर्ण प्रेम-सी। यह सटीक उत्तर होता है— जैसा मैं देख पाता हूँ, बिल्कुल वैसा। किसी औपचारिक अभिवादन की प्रतिअभिव्यक्ति मात्र, तो बिल्कुल भी नहीं। खैर छोड़ो, कुछ बातें, कुछ अहसास, और इत्र— भीने होते हैं, अनुभूतियों में स्थित, पर शब्दों से परे। कुछ कस्तूरी सा है भीतर,  कहीं दिखता भी नहीं,  कमबख्त ! ...