Wednesday, November 14, 2012

तुमसे से मिलने की आस है बाकी

 तुमसे से  मिलने की आस है बाकी ,
वरना तो हम इस  ज़िन्दगी से डरते हैं ;
तुम ही क्यों  समझ नहीं पाई ,
की हम तो बस तुम ही पे मरते हैं

कल रात थी दिवाली की सो ,
मुबारक हो तुमको वो दीपक औ बाती ;
वो बिजली-जुगनू और चाँद -सितारे ,
हम तो अब रौशनी से डरते हैं ,

साँस कुछ और बाकी  है मेरे खाते में  ,
वरना अब तो बस कुछ यादें हैं, जो की आती-जाती हैं ;
 तुमसे से  मिलने की आस है बाकी ,
वरना तो हम ज़िन्दगी से डरते हैं ;


Wednesday, September 5, 2012

मैं आज शायद कमज़ोर पड़ने लगा हूँ

तेरा बस नशा है ,    तेरी ही खुमारी ,
 खो गए मेरे  दिन हैं और हुईं रातें खाली ,
मैं थक भी गया हूँ  अब रोंने चला  हूँ '
दीवारें ना देखें की कमज़ोर, मैं हो गया हूँ ;

इस डर से अब ख़ुद में ही , मैं घुलने लगा हूँ ,
ग़र मैं कभी टूट जाऊं तभी तुम भी आना ;
तुम्हे बस कुछ मालाएँ मिलेंगीं ,
मैं आंसुओं से  मोती पिरोने लगा हूँ ;

दीवारें ना देखें  की कमज़ोर मैं हो गया हूँ...
धुआं भी है छाया और पड़ा  ज़ाम खाली;
 खुद अपना साक़ी   ,मैं बनने चला हूँ ,
 मैंअब तो सोते हुए, तेरा नाम लेने लगा हूँ ;

दीवारें न सुन लें कि अब कौन मेरा
 बिस्मिल बनने लगा है सो अब मैं भी छुप के ;
मोतियों पर,  तेरा नाम लिखने लगा हूँ,
शायद  मैं अबतक कमज़ोर पड़ने लगा हूँ ।

 ग़र मैं कभी टूट जाऊं तभी तुम भी आना ,
तुझे तेरा नाम फिर भी संवारा मिलेगा ;
बात ये दीगर है की कोई दीवाना तेरा तुझको ,
वहाँ बिखरा  मिलेगा ;
  तुम गम ना करना तुम हो आज सुन्दर
और भी तुमको कई लोग,मिलेंगे
मगर जब ना हो कोई पास तेरे ,
तु बस एक बार मेरा नाम लेना ,
एक बिखरा हुआ बुत तुझे तेरे पीछे
सवंरता  मिलेगा  ,नींद से उठते ही कोई ,
तुझको तेरा नाम लेता मिलेगा ;;;;;;;;;;




Sunday, September 2, 2012

तश्वीर

हांथों   की  लकीरों  को  मोड़  के,  तेरी   तश्वीर   बना   लूँ ,
मिळ जाए ग़र ख़ुदा तो आज तुझे मै अपनी तकदीर बना लूँ !